Bad Bank क्या होता है और Bad Bank कैसे कार्य करता है

Bad Bank क्या होता है और Bad Bank कैसे कार्य करता है

 Bad Bank क्या होता है

अगर आप भी “Bad Bank क्या होता है” और इसका क्या कार्य होता है इसके बारे में जानना चाहते हैं तो हम आपको बता दें कि आप Website पर पहुंचे हैं।

आज हम आपको Bad Bank जिससे कि हाल ही में 2021 के बजट में बनाने के संबंध में जिक्र किया गया है इसके बारे में पूरी जानकारी देने वाले हैं। हमें उम्मीद है कि आप हमारा यह पोस्ट पूरा जरुर पढ़ेंगे और Bad Bank से जुड़ी सारी जानकारी के बारे में समझेंगे।

जैसा कि आप जानते हैं बैंकों में लगातार हो रही धोखाधड़ी और लोन लेने के बाद Bank loan चुकता ना करने के दिन आए खबरें आप सुनते ही होंगे। Bad Bank कुछ इसी प्रकार से इन समस्याओं के निपटारे के लिए बनाया जाता है।

Bad Bank क्या होता है?

बैड बैंक देश में बने हुए सभी सरकारी और गैर सरकारी बैंकों में एनपीए को खरीद कर उनकी भरपाई करता है और इसके बदले प्रॉफिट या फिर कमीशन अपने पास रख लेता है।

हम जानते हैं कि उपरोक्त बताई गई जानकारी को भलीभांति समझने के बाद भी आप बेड बैंक के अर्थ के बारे में अच्छे से नहीं जान पाए होंगे।

इसलिए यदि आप बेड बैंक से संबंधित कंप्लीट जानकारी अच्छे से समझाना चाहते हैं तो इससे पहले आपको बैंकों और बैंकों से जुड़े नॉन परफॉर्मिंग असेट्स यानी कि NPA (एनपीए) के बारे में समझना आवश्यक है।

NPA (Non Performing Assets) क्या होता है?

चलिए अब एनपीए के बारे में समझ लेते हैं जो कि बैंकों से काफी अच्छा संबंध रखता है दोस्तों बैंक जो कि हमारी आर्थिक स्थिति और साथ ही देश की आर्थिक स्थिति को सुधारने में काफी अच्छा काम करते हैं।

इसी के साथ जब हमारे घरेलू या फिर हमें जीवन में कभी भी पैसों की मंदी या फिर किसी भी प्रकार की संपत्ति और बैंकिंग से जुड़े कार्य को करने की जरूरत पड़ती है। तो बैंकों का इसमें बहुत भूमिका होती है।

क्या आपने कभी सोचा है कि बैंकों में पैसा कहां से आता है हमारे द्वारा बचत खातों में रखा हुआ पैसा बैंक जरूरतमंद लोगों को लोन लोन के रूप में प्रदान करता है और इसी के साथ हम नए व्यापार, आर्थिक तंगी, मकान बनाने और शिक्षा के लिए बैंकों से लोन लेते हैं।

लेकिन जब बैंकों से लोन के रूप में लिया गया यही पैसा हम बैंकों को ब्याज समेत वापस नहीं दे पाते तो बैंक दिए गए लोन को रिकवर करने के लिए हमसे ब्याज समेत लोन राशि वापस पाने के लिए Legal Notice भी भेजता है।

लेकिन फिर भी जब हम बैंकों का लिया गया लोन वापिस नहीं करते हैं तो यह Non Performing Assets यानी कि NPA के रूप में बैंकों की Balance Sheet में अपनी जगह बना लेता है।

जब बैंक दिए गए लोन को रिकवर करने में सक्षम नहीं रहता तो वह अपने कस्टमर को लोन देना अच्छा नहीं समझता या फिर बैंक कस्टमर्स के द्वारा की जाने वाली बैंकिंग ट्रांजैक्शन पर लिमिट लगा देता है।

जिससे कि Banking Services में अच्छी गुणवत्ता का बना रहना संभव नहीं हो पाता। इसलिए जब बैंकिंग सर्विसेज के गुणवत्ता में कमी आती है तो यह कहना भी गलत नहीं होगा कि इससे हमारे देश की आर्थिक स्थिति मैं भी कमी देखने को मिलती है।

काफी सारे देशों में बेड बैंक बनाए जा चुके हैं जो कि लोगों से बैंकों द्वारा लिए गए लोन की रिकवरी की जिम्मेदारी लेते हैं और सरकारी या गैर सरकारी बैंकों के एनपीए को कम करते हैं।

इससे देश की आर्थिक स्थिति और जीडीपी में सुधार होता है। क्योंकि जब बैंकों के एनपीए में कमी आएगी तो बैंकों के बैंकिंग सर्विसेज गुणवत्ता में भी सुधार होगा।

इसे नए लोग बैंकों के साथ जुड़ना पसंद करेंगे और बैंकों से लोन लेंगे और उसे समय पर चुकता करना भी अपनी जिम्मेदारी समझेंगे। 

क्योंकि यदि बैंकों से लिया गया Loan लेकर वह उसकी भरपाई नहीं करते । तो उन्हें Bad Bank से निपटना होगा।  बैड बैंक लीगल तरीके से उन पर कार्यवाही करेगा और बैंक से लिए गए लोन की बकाया राशि रिकवर करेगा।

Bank NPA में कमी होने के लाभ

NPA जिसका पूरा नाम है Non Performing Assets यानी कि ऐसे Assets जो बैंक की Balance Sheet में व्यर्थ पड़े हैं अथवा उनकी पूर्णता भरपाई होने या ना होने की कोई गारंटी नहीं है।

आइए जानते हैं कि बैंक NPA का कम होना क्यों जरूरी है और बैंक NPA कम होने से हमारे देश को क्या लाभ होता है

  • Bank Balance Sheet Healthy और अच्छी रहती है।
  • नए व्यापार शुरू होने और बैंकों द्वारा नए लोन दिए जाते हैं।
  • Banking Services और Transaction में सुधार होता है।
  • देश की GDP में सुधार होता है।
  • बैंक के ग्राहक लोन के रूप में ली गई राशि समय पर चुकता करते हैं तभी बैंक के NPA में कमी आती है।

देखा आपने बैंकों का एनपीए कम होना कितना आवश्यक है और यह देश की आर्थिक स्थिति और देश के नागरिकों के साथ-साथ देश के विकास में भी कितनी अहम भूमिका रखता है।

Bank NPA में वृद्धि होने के नुकसान

  • Bad Debts बढ़ने से बैंक बैलेंस शीट Healthy नहीं रहेगी।
  • बैंकों द्वारा ग्राहकों को कम लोन दिए जाएंगे।
  • बैंकों घोटालों में वृद्धि होगी जिससे एमपी में वृद्धि होगी।
  • नया व्यापार शुरू करने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा।
  • बैंक ग्राहकों को नए लोन अप्रूव नहीं किए जाएंगे।
  • देश की जीडीपी में सुधार नहीं होगा।

आइए अब Bad Bank के बारे में थोड़ा संक्षिप्त में जान लेते हैं दोस्तों Bad बैंक जिसे की बैंक को में पड़े हुए Bad Debts या लोन की रिकवरी के लिए पूर्णतः सरकार द्वारा भी बनाया जाता है और सरकार और फाइनेंस कंपनी के साथ-साथ पब्लिक की हिस्सेदारी के साथ ही बनाया जा सकता है।  बैड बैंक को ऐसा भी हो सकता है कि 10 या 15 वर्षों के लिए ही बनाया जाए ताकि इससे देश की जीडीपी में सुधार हो और बैंक सर्विस की गुणवत्ता में क्वालिटी आ सके।

Bad Bank देश की आर्थिक स्थिति और बैंकों में बढ़ते हुए घोटालों को रोकने के लिए बनाया जाता है।

Bad Bank कैसे कार्य करता है?

Bad Bank किस प्रकार से लोन रिकवरी का कार्य करता है आइए इसके बारे में एक उदाहरण के माध्यम से समझ लेते हैं

मान लीजिए राम जोकि बैंक का ग्राहक है और उसके पास 10,000 की संपत्ति है और वह अपने बैंक से 15,000 का लोन लेता है।

लेकिन समय के अनुसार या फिर राम के द्वारा बैंक लोन चुकाया नहीं जाता या फिर धोखाधड़ी के चलते वह बैंक लोन चुकता नहीं करता है।

तो बैंक बैलेंस शीट में यह 15,000 का Loan Amount, NPA या Bad Debts के तौर पर अपनी जगह बना लेता है। भविष्य में इसकी कोई गारंटी नहीं है कि राम बैंक के द्वारा लिया गया लोन चुकता करेगा या नहीं।

बैड बैंक जिन्हें की लोन रिकवरी के लिए बनाया जाता है। जिस बैंक के द्वारा लोन राम को दिया जाता है वह बैंक लोन रिकवरी का सारा कार्य बैड बैंक को सौंप देता है।

दिए गए Loan (15000) में से 14000 रुपए की राशि बैड बैंक उस बैंक को प्रदान कर देता है और बाकी बचा ₹1000 की राशि अपने हिस्से में रख लेता। क्योंकि वह बैंक रिकवरी का कार्य करता है।

राम की 10,000 की संपत्ति को ज़ब्त कर के बैड बैंक लोन राशि में से कुछ हिस्सा रिकवर कर लेता है। और बाकी बची हुई 5000 राशि बैड बैंक लीगल तरीके से चुकता कर ही लेता है।

Bad Bank बनाने के लाभ और हानियां

जैसा कि आप सब जानते हैं 2021 के बजट में वित्त मंत्री के द्वारा बैड बैंक बनाने के संबंध में कहा गया है आइए जानते हैं बैड बैंकों के  बनने के बाद हमें कौन से फायदे और नुकसान होने वाले हैं अपनों में और आर्थिक सलाहकारों के नजरिए से समझते हैं

इकोनॉमिस्ट और सरकार के विरोधी दलों के नजरिए से

इकोनॉमिस्ट और सरकार के विरोधी दलों द्वारा का ऐसा मानना है बैड बैंक के बनने के बाद सरकारी और गैर सरकारी बैंक बिना किसी डर के लोगों को लोन बांटना शुरु कर देगा और या फिर बड़े बड़े पूंजीपतियों के द्वारा लिया गया लोन डैड बैंक के द्वारा माफ कर दिया जाएगा।

उपरोक्त दृष्टिकोण भारत में चल रहे डिबेट और विरोधी दलों के बयानों के आधार पर जानकारी दी गई है।

आर्थिक सलाहकारों के नजरिए से

आर्थिक सलाहकारों का ऐसा मानना है कीपैड बैंकों के निर्माण से सरकारी और गैर सरकारी यानी कि निजी बैंकों को इसका बहुत लाभ पहुंचेगा और बैंक बैलेंस शीट साफ-सुथरी रहेगी जिसमें किसी भी प्रकार के बैंक घोटाले का जिक्र नहीं होगा। 

क्योंकि Bad Bank के द्वारा एनपीए को खरीद कर Loan रिकवर कर लिया जाएगा। जिससे कि देश की आर्थिक स्थिति में सुधार होगा और देश की जीडीपी में वृद्धि होगी।

Conclusion

Bad Bank जिन्हें की Loan Recovery और बैंकों के NPA को कम करने के लिए बनाया जाता है और इससे देश की आर्थिक स्थिति में भी सुधार होता है। जो कि हर देश के लिए काफी जरूरी होता है क्योंकि जब देश आर्थिक तौर पर मजबूत होगा तो देश के विकास में काफी सहायता मिलेगी।

बैड बैंक के निर्माण के बारे में आपका क्या सुझाव है नीचे कमेंट करके जरूर बताइएगा और अगर आपको हमारा यह पोस्ट जो कि Bad Bank से संबंधित अच्छा लगा हो इसे अपने मित्रों के साथ साझा जरूर करें।

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